Saturday, 31 December 2016

Hindi Romantic shayari

फज़ा में आग़ है मन्ज़र गुलाब जैसा है ! हर - एक चेहरा कोई इंक़लाब जैसा है ! मैं पढ़ रहा हूँ मौहब्बत की सारी तहरीरें ! तुम्हारा चेहरा मुक़म्मल किताब जैसा है ! किसी गुलाब की दो पँखुड़ी से लब तेरे ! तेरी नज़र में नशा भी शराब जैसा है ! कहाँ से लाऊँ मैं तेरा जवाब दुनियाँ में ! तू अपने आप में खुद ही जवाब जैसा है ! जो मेरे दिल के समंदर में कर गया हलचल ! वो एक लम्हा निगाहों में ख्वाब जैसा है ! हो जैसे चाँद किसी अब्र की पनाहों में ! तेरी नज़र का झुकाना नक़ाब जैसा है ! क़रीब आओ मुझे ज़िन्दगी अता कर दो ! तुम्हारा रूठना मुझ पे अज़ाब जैसा है ! तुम्हारी ज़ुल्फ़ घटा आँख है के मयखाना ! तुम्हारा चेहरा कोई आफ़ताब जैसा है ! ज़माने भर की हसीनों में वो शवाब नहीं ! "कशिश"हमारे सनम का शवाब जैसा है !

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